तेरे दिल का रास्ता – सर्वजीत

Sarvajeet D Chandra Avatar

जीवन की शाम जब आती है
तो घर के लिये दिल मचलता है
उम्र गुज़र गई, हम ढूँढते ही रहे
किस मोड़ पर तेरे दिल का रास्ता है

तेरी आरज़ू चंद कवितायें बन गयीं
तेरी हसरतों की हसरत करते ही रहे
अगर ग़ौर से पढ़ती, इल्म होता तुम्हें
मेरे लफ़्ज़ों में तेरा अक्स झलकता है

एक पौधा हूँ जो कभी उगा ही नहीं
अनखिली कलियों का दम भरता है
तनहाइयों से काम चलता है लेकिन
तेरी क़ुर्बत के लिए दिल तरसता है

एक मिट्टी से बनी हम दोनों की रूह
एक लय पर अपना दिल धड़कता है
तेरे उजाले, बसंत की चाह नहीं मुझे
दिल ढूँढता तेरे दर्द, ग़म का रास्ता है

उम्र गुज़र गई, हम ढूँढते ही रहे
किस मोड़ पर तेरे दिल का रास्ता है


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