मंज़िल पाने की होड़ में,
अव्वल आने की दौड़ में,
राहों में जो सुकून था,
रिश्तों का जो जुनून था,
हर मोड़ पर बिखरी यादें थीं,
हर शख़्स से जुड़ी, पुरानी बातें थीं,
फूलों सा खुशनुमा पड़ाव था,
शीतल छाँव में जो ठहराव था…
सब नज़रंदाज़ करता रहा,
खालीपन दिल में भरता रहा,
अंदर ही अंदर बिखरता रहा।
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